रविवार, 19 सितंबर 2021

उस वर्षा से कोई लाभ नहीं जो फ़सल जलने के बाद हो। उस पश्चात से कोई फायदा नहीं जो अवसर चूक जाने के कारण हो।

 स्वामी रामतीर्थ ने कहा है.....

इस जीवन को खोए हुए अवसरों की कहानी मत बनने दो। जहाँ अवसर दिखे तुरंत छलांग लगाओ. पीछे मुड़ कर मत देखो।


अज्ञात का कहना था। जब दिमाग कमजोर होता है, परिस्थितियाँ समस्या बन जाती हैं. जब दिमाग स्थिर होता है, परिस्थितियाँ चुनौती बन जाती हैं. जब दिमाग मजबूत होता है, परिस्थितियाँ अवसर बन जाती हैं.


हमारे जीवन में कई बार ऐसा होता है कि हम मिले हुए अवसर को पहचान ही नहीं पाते। इसलिए कभी भाग्य तो कभी किस्मत के भरोसे बैठ जाते है। तो कभी सोचते है भगवान स्वयं आकर हमारी मदद करें। भगवान अवसर तो देतें है । ईस्वर कोई न कोई श्रोत भेजते है जिससे हमारी मदद हो सके।।परंतु हम अपने जिंदगी में इतना अस्त व्यस्त होगये है कि हमें मिले हुए अवसर भी गवा देते है।

आईये एक कहानी से शुरू करते है।

एक गांव में एक संत रहता था जो ईश्वर का बहुत बडा भक्त था और वह रोज उनका ध्यान करता, भजन गाता और तपस्या करता था। गांव के लोग भी उसे अच्छा मानते थे और उसका सम्मान करते थे। उसका ईश्वर पर अटूट विश्‍वास था।








फिर एक बार गांव की नदी में उफान उठा और गांव में भीषण बाड़ आ गई। चारों ओर जल ही जल था। जल प्रलय हो गई था। सभी लोग अपनी अपनी जान बचाकर भाग रहे थे। कोई ऊंचे स्थान की ओर भाग रहा था तो कोई गांव छोड़कर ही भाग रहा था। परंतु सभी ने देखा की संत महाराज अपनी भी अपनी कुटिया के पास पेड़ के नीचे बैठे प्रभु का भजन कर रहे हैं। सभी ने उन्हें यह जगह छोड़कर अपने साथ चलने की सलाह दी। परंतु संत महाराज ने कहा कि तुम लोग अपनी जान बचाओ, मेरी जान तो ईश्‍वर बचाएगा। यह सुनकर सभी वहां से चले गए।












फिर धीरे धीरे जल का स्तर बढ़ने लगा और पानी संत महाराज की कुटिया में घुस गया और संत महाराज की कमर तक पानी पहुंच गया। इतने में वहां से एक नाव गुजरी। नाविक ने कहा, महाराज आप इस नाव पर सवार हो जाइये मैं आपको सुरक्षित स्थान पर उतार दूंगा। नाविक की बात सुनकर संत महाराज ने कहा कि नहीं मुझे तुम्हारी सहायता की आवश्‍यकता नहीं, मुझे तो मेरा ईश्वर बचाएगा।... नाविक ने बहुत बार कहा कि महाराज जिद ना करें बैठ जाएं। परंतु महाराज नहीं मानें। उन्हें तो अपने भगवान पर अटूट विश्‍वास था। 









नाव वाला वहां से चुपचाप चला गया।कुछ बाढ़ और प्रलयंकारी हो गयी और संत महाराज ने तब एक वृक्ष पर चढ़ना ही उचित समझा। वृक्ष पर बैठकर वे ईश्वर को याद करने लगे। तभी अचानक उन्हें गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दी। उनके सिर के उपर एक हेलिकोप्टर था जो उनकी सहायता के लिए आ पहुंचा था। बचाव दल ने एक रस्सी लटकाई और संत महाराज को उस रस्सी को जोर से पकड़ने को कहा। परंतु वह संत महाराज भी बड़ा अड़ियल था। वह फिर बोला- 'मैं इसे नहीं पकड़ सकता क्योंकि मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा।'... उसकी जिद के आगे बचाव दर को भी हार मानना पड़ी और वह भी लौट गया।....कुछ ही देर में बाढ़ ने वृक्ष को अपनी चपेट में ले लिया और संत महाराज की मृत्यु हो गई।


मृत्यु के बाद संत महाराज स्वर्ग पहुंचे और तब अपने भगवान से बोले, 'हे प्रभु! मैंने तुम्हारी इतनी भक्ति की, अपना विश्‍वास कभी टूटने नहीं दिया और हर तरह से पूजा पाठ की परंतु जब मैं पानी में डूब कर मर रहा था तब आप मुझे बचाने क्यों नहीं आए?

 इस पर भगवान बोले, 'हे संत महाराज मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूं इसीलिए मैं तुम्हारी रक्षा करने के लिए एक नहीं बल्कि तीन बार आया। पहली बार ग्रामीणों के रूप में, दूसरी बार नाविक के रूप में और तीसरी बार हेलीकॉप्टर के बचाव दल के रूप में, परंतु तुम मेरे  इन अवसरों को पहचान नहीं पाए। अब बताओं मैं क्या करता?

  इस कहानी से सीख यह मिलती है कि ईश्‍वर तो हमें बचाना चाहता है परंतु हम ही नहीं बचना चाहते हैं। अर्थात आपके जीवन में कई अवसर आते हैं परंतु आप उसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। अवसर किसी की प्रतीक्षा नहीं करते हैं वे तो आते हैं और चले जाते हैं। अत: उन्हें पहचान कर उनका लाभ उठा लेना चाहिए।प्रत्येक प्राणी के जीवन में ऐसा एक अवसर अवश्य आता है जब भाग्य उसे कुछ करने या कुछ बनने का मौका देती हैं और वहीं मौका उसके भविष्य का निर्णय भी कर देता है

सोमवार, 13 सितंबर 2021

तेज हवाओं के बाद भी ये दीये जलते रहे, नजर मंजिल पर थी, इसलिए मुसाफिर चलते रहे।

 जब हम अपने लक्ष्य को चुनते है,,तो बहुत सी परेशानियाँ आती है। कुछ इन समस्याओं से उभर कर अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए एक ही स्वर में एक ही धुन में,लगन और परिश्रम से आगे बढ़ जाते है। तो कोई इन्हीं परेशानियों के सामने अपने घुटने टेक देता है। और अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाता। जिस व्यक्ति की नजर अपने लक्ष्य पर होती है वही आगे बढ़ता है। विजय पताका उसी व्यक्ति के हाथ में होती है, जो अपने जीवन में सार्थक प्रयास करता है। 

कहते है न,हम जो करते है,,, हमें वही मिलता है। इसलिए सफल प्रयास करके ही सफलता पाई जा सकती है।क्योंकि जिंदगी हमें देत नहीं है। लौटाती है ,जो हम दिए होते है जिंदगी में। किसी को भी दुखी करके देखो, तुम दुखी हो ही जाओगे। और इससे उलटा भी सही है। तुम किसी को सुखी करके देखो और तुम पाओगे कि सुख न मालूम कितने रूपों में तुम्हारे हृदय में भी गुंजरित हो उठा है। और तुम किसी के रास्ते से एक छोटा सा कांटा भी हटाओ, तो तुम्हारे अपने रास्ते से अनेक कांटे हट जाते हैं। और तुम किसी के रास्ते पर एक छोटा सा फूल भी रखो, तो तुम्हारे रास्ते पर फूल की शय्या बिछ जाती है। क्योंकि तुम जो भी कर रहे हो, उसकी अनंत गज चारों ओर हो जाती है। और इसीलिए हो जाती है अनंत तक क्योंकि तुम जुड़े हो, संयुक्त हो।

एक छोटा सा भी विचार तुम्हारे भीतर पैदा होता है, तो सारा अस्तित्व उसे सुनता है। और थोड़ा सा भाव भी तुम्हारे हृदय में उठता है, तो सारे अस्तित्व में उसकी झंकार सुनी जाती है। और ऐसा ही नहीं है कि आज ही, अनंत काल तक वह झंकार सुनी जाएगी।  क्योंकि अस्तित्व के, प्रकृती के, परमात्मा के, नियम और स्वर एक हैं। और यह नियम और स्वर किसी के लिए नही बदलते।

चलिये एक कहानी से शुरू करते हैं :-
 
नसीरुद्दीन के संबंध में एक मजाक बहुत जाहिर है। एक तारों वाला वाद्ययंत्र उठा लाया था,, फकीर नासिरुद्दीन। पर उस वाद्य की गर्दन पर एक ही जगह ऊँगली रख कर तारों को रगड़ता रहता था। पत्नी परेशान हुई, एक दिन, दो दिन, चार दिन, आठ दिन बीत गए। अब पत्नी को रहा न गया उसने कहा छामा करिए लेकिन ये कौन सा संगीत आप पैदा कर रहे है। मोहल्ले के लोग भी बेचैन और  परेशान हो गए की आधी आधी रात और वो एक ही तूं तूं तूं एक ही बजती रहती थी। 


















आखिर सब परेशान हो गये और नसीरुद्दीन के घर जा कर कहा, नादिरुद्दीन अब बस करो।  बहुत देखे बाजने वाले तुम नए बाजने वाले मालूम पड़ते हो। हमने बड़े बड़े बजाने वाले देखे है आदमी हाथ को इधर उधर भी सरकाता है,उंगली फेर कर नयी धुन बनाता है कई आवाज निकालता है,तुम ये क्या तूं तूं एक ही लगाए रहते है हो?? सर पक गया है!!! सब परेशान होगये है।

मोहल्ला छोड़ने का विचार हो रहा है। अब या तो तुम छोड़ तो या तो हम। मगर इतना तो बता दो,,,तुम जैसे बुद्धिमान आदमी और ये एक ही आवाज़ तूं तूं ऐसा तो हमने कभी कोई संगीतज्ञ नही देखा। 
नसीरुद्दीन ने कहा वो लोग अभी ठीक स्थान खोज रहे है। मैं पहुँच गया हूं। नीचे ऊपर उंगलियाँ घुमा कर देख रहे है कि कहा सही धुन है,,कहा ठहर जाये। मैं पहुँच गया हूं,,,मुझे सही धुन मिल गई है। मैं तो वही बजाऊंगा। मंजिल आ गई। 
‌ये मजाक था नसीरुद्दीन का। लेकिन नसीरुद्दीन ने बड़े गहरे और कीमती मजाक किये। अगर परमात्मा, प्रकृति और ये संपूर्ण ब्रम्हांड कोई स्वर बजाता होगा तो एक ही होगा।



























हाथ उसका इधर उधर न सरकता होगा। वहाँ कोइ धारा न बहती होगी, वहाँ कोई परिवर्तन न होगा। सबके लिए नियम एक ही होगा। प्रकृति कोई भेदभाव नहीं करती।
 सबको बराबर के मौके दिए जाते है। पहुँचता वही है जो अपने लक्ष्य पर पहुँचने के लिए, अपने काम के प्रति, एक ही स्वर, एक ही दिशा में मेहनत करे, प्रयास करे।  समर्पण की भावना सदैव आपको कामयाब बनायेगी। कोई भी काम आप करते हो उसमें अपने आप को इसतरह व्यस्त कर लीजिये की दूसरा कुछ करने को रह ही न जाये। और तब तक उस काम में लगे रहिये जब तक आपको सफलता न मिल जाये। क्योंकि एक साथ,अलग-अलग नाव में पैर नहीं रखे जा सकते। किनारे पहुँचने के लिए आपको एक ही नाव में पूर्णरूप से बैठना होगा। ठीक इसी प्रकार एक काम को करने की कला और उसके प्रति एक राग,,एक दिशा और आपकी मेहनत, लगन और पूर्णरूप से समर्पण ही आपको सफलता दिलाएगी।





रविवार, 5 सितंबर 2021

जो होता है, अच्छे के लिए होता है।

 जीवन में जो होता है अच्छे के लिए होता है।  जीवन की हर घटना का संबंध भविष्य की घटनाओं से होता है, जो हम उस समय नहीं देख पाते हैं।  हम इसे केवल तभी वापस जोड़ पाते हैं जब कनेक्टिंग भविष्य की घटना हो जाती है।  जब हम उन पिछली घटनाओं को जोड़ते हैं, तो हमें महत्व का एहसास होता है।  इसलिए, हमें हमेशा आशावादी रहना चाहिए और चीजों के उज्जवल हिस्से को देखना चाहिए। चाहे कुछ भी हो जाए, जो हमारे पास है उसके लिए हमें आभारी होना चाहिए, न कि जो हमने खोया है उसके लिए दुखी होना चाहिए।  हमें अपना ध्यान सकारात्मक भागों पर केंद्रित करना चाहिए और चीजों को पूर्णता के साथ देखना चाहिए।

एक राजा की एक पुरानी कहानी है;  

जिसका एक बहुत करीबी दोस्त था 
जिसके साथ वह बड़ा हुआ था। 
 राजा अपना काफी समय 
अपने सबसे
 अच्छे दोस्त के साथ बिताते थे।  
उसके दोस्त की आदत थी कि 
वह अपने 
जीवन में कभी भी 
(सकारात्मक या नकारात्मक) 
हर स्थिति को आशावाद के साथ 
देखता था 
और टिप्पणी करता था,
बहुत बढियाँ हो गया।
 सब कुछ अच्छे के 
लिए होता है!"  
उसने  हमेशा चीजों को अलग
 नजरिए से देखने 
और जीवन में जो कुछ भी होता है 
उसके सकारात्मक प्रभावों का 
पता लगाने 
की कोशिश करता। एक दिन 
राजा अपनी 
तलवार साफ कर रहा था। 
अचानक राजा के हाथ से तलवार 
छूट गई, 
और राजा के अंगूठे पर गिर गई।
 राजा का अंगूठा कट गया।






 राजा पीड़ा से चीख पड़ा। 
इतने में दोस्त ने 
राजा से कहा बहुत 
बढियाँ हो गया। राजा आग 
बबूला होगया।
 उसने, अपने दोस्त 
को जेल मे डाल दिया। 
और कहा मैं तकलीफ में हूँ। 
मेरा अंगूठा कट गया और 
तुम्हारे लिए 
बहुत बढ़िया होगया????
अब जाओ जेल में वही अपनी 
पूरी ज़िन्दगी 
गुज़ारना। और कहते रहना 
बहुत बढियाँ हो गया। 
राजा का दोस्त, 
राजा के इस सजा से बहुत खुश हुआ 
और उसने कहा बहुत बढ़िया 
होगया।  एक दिन राजा शिकार 
पर निकले थे।  
वह घना जंगल था






वहाँ आदिवासी भी रहते थे। 

उन्होंने राजा के 

दोनों हाथ बाँध दिए, 

और उन्हें अपने स्थान पर ले आये। 

और कहा बली देंगे। राजा एकदम से 

घबरा गया। जैसे ही वे 

लकड़ी में आग लगाने के लिए 

करीब आए,

 उन्होंने देखा कि राजा का अंगूठा 

कटा हुआ है। अंधविश्वासी 

आदिवासी होने के कारण,

 उन्होंने कभी भी किसी ऐसे व्यक्ति 

की बली नही दी 

जो अपूर्ण हो।तब उन्होंने राजा को 

खोलकर उसके मार्ग पर भेज दिया।








जब राजा घर लौटा, तो उसे 

उस घटना की 

याद आई,  जिस वजह से 

उसका  अंगूठा कट गया था। 

राजा बहुत दुखी हुआ।   

राजा ने तुरंत अपने दोस्त 

को जेल से रिहा 

करने का आदेश दिया राजा ने 

अपने दोस्त से, 

उसे क्षमा करने का 

अनुरोध किया और कहा। 

 "आप ठीक कह रहे थे !!!  

अच्छा हुआ कि उस दिन तलवार 

के गिरने से मेरा 

अंगूठा कट गया। 

और वह वजीर को सब बताने लगा  

जो उसके 

साथ जंगल में  हुआ था 

और कैसे आदिवासी ने उसके 

अंगूठे के गायब 

होने के कारण उसे मुक्त कर दिया।  

राजा ने कहा , 

उस दिन नाराज़ होकर 

आपको जेल भेजने के लिए मुझे बहुत 

अफ़सोस है।  

यह मेरी ओर से एक बुरा निर्णय था।  

कृपया मुझे माफ़ करें"


"नहीं," उसके दोस्त ने जवाब दिया, 

बहुत बढिया होगया।  

सब कुछ अच्छे के लिए होता है!"

राजा उसके 

प्रत्यक्षवाद से चकित हो गया 

और पूछा, "तुम्हारा क्या मतलब है, 

मेरी तो जान बच गई। लेकिन तुम बिना 

किसी वजह के 

जेल में रहे ये कैसे 

बहुत बढ़िया होगया????

उसका दोस्त मुस्कुराया 

और जवाब दिया, 

"अगर मैं जेल में नहीं होता, 

तो मैं आपका मित्र था 

आपके साथ ही जाता जंगल।   

आपका शरीर,

 अंगूठा न होने की वजह से 

अपूर्ण था। इसलिए 

आदिवासी ने 

आपको छोड़ दिया । 

लेकिन मेरी शरीर पूर्ण हो 

जाती और मैं मारा जाता । 

इसलिए ये भी बहुत बढियाँ 

होगया की में जेल में था।

इसतरह से हमें अपने 

ज़िन्दगी का सबसे 

बहेतरीन अवसर मिलता है। 

लेकिन कुछ खो देने के 

बाद या असफल हो 

जाने के बाद हम प्रयास ही 

करना छोड़ देते है। 

ये भूल ही जाते है 

कि जो कुछ 

भी होता है अच्छे के लिए 

होता है। 

अगर आपके साथ कुछ 

बुरा हो रहा है, 

तो वह बुरा लगता है 

असल में बुरा है नहीं, 

आगे जा कर आपको पता 

चलता है 

की जो बुरा हुआ था 

अच्छे के लिए हुआ था।

रविवार, 29 अगस्त 2021

समंदर मोती लूट देता है। फिर भी लोग उसे खारा कहते है।

 

उस वर्षा से कोई लाभ नहीं जो फ़सल जलने के बाद हो। उस पश्चात से कोई फायदा नहीं जो अवसर चूक जाने के कारण हो।

  स्वामी रामतीर्थ ने कहा है..... इस जीवन को खोए हुए अवसरों की कहानी मत बनने दो। जहाँ अवसर दिखे तुरंत छलांग लगाओ. पीछे मुड़ कर मत देखो। अज्ञात...