गुरुवार, 18 मार्च 2021

इनसे लड़ने की हिम्मत बढ़ाओ यारों हादसे टलते तो नही हादसों पे रोने से। #motivation#loveuzindagi#zindaginamlegidobara

 तुम्हें अगर जिंदगी को जिंदा बनाना है, तो बहुत सी जिंदा मुश्किलें खड़ी हो जायेंगी, लेकिन मुश्किलें अगर नहीं होंगी, तो तुम मरे मरे से जिओगे. तुम्हारे जीने और मरने में कोई सार नहीं।

मेरे प्रिय मित्रों,

उलझने मीठी भी हो सकती है, जलेबी इस बात की जिंदा मिसाल है।

 एक कहानी कहती हूँ, जिसे आप मेरी बातों को और गहराई से समझेंगे।

एक बगीचे मैं एक छोटा सा फूल, घास का फूल दीवाल की ओट में ईंटों में दबा हुआ जीता था।

तूफान आते थे, उस पर चोट नहीं लग पाती थी, क्योंकि ईंटों की आड़ थी, सूरज निकलता था, उन फूलों को सता नहीं पाता था क्योंकि उस पर ईंटों को आड़ थी। बारिश अपने तेज फुहारों से भी उसे गिरा नहीं पाती थी। क्योंकि वह पहले से जमीन से लगा हुआ था। उसी के पास कुछ गुलाब के फूल भी थे।

एक रात उस घास के फूल ने ईश्वर से प्रार्थना की, कि हे परमात्मा! मुझे गुलाब का फूल बना दो, मैं कब तक घास का फूल बना रहूँगा। अगर जरा सी भी आपकी कृपा दृष्टि है मुझ पर तो मुझे कृपा करके गुलाब का फूल बना दें।

ईश्वर ने उसे बहुत समझाया कि तू इस झंझट में मत पड़, गुलाब के फूल की बड़ी मुसीबतें हैं, बड़ी तकलीफ़ें हैं, बड़ी समस्यायें हैं। जब तूफान आता हैं तब गुलाब की जड़े उखड़ी – उखड़ी हो जाती है, और जब गुलाब में फूल खिलता है तो खिल भी नहीं पाता कोई तोड़ लेता है। 

वर्षा आते की गुलाब की पंखुडियाँ टूट कर अलग हो जाती है। तू इस झंझट में मत पड़। घास के फूल ने कहा बहुत दिन सुरक्षा में जी लिया, अब झंझट लेने का मन होता है। आप तो मुझे गुलाब बना दो। बस एक दिन के लिए ही सही लेकिन मुझे गुलाब बना दो।

 परमात्मा ने और आस पड़ोस के फूलों ने समझाया इस पागलपन में मत पड़, हमने सुनी है कहानियाँ कि पहले भी हमारे पूर्वज इस पागलपन में पड़ चुके है फिर बड़ी मुश्किलें आती हैं।

हमारा जातिगत अनुभव कहता है कि हम जहाँ हैं ठीक हैं, बड़े मजे में हैं। पर उसने कहा कि मैं सूरज से बात नहीं कर पाता, मैं कभी तूफानों से लड़ नहीं पाता, मैं कभी बारिश को झेल नहीं पाता।

उसके आस पास के पौधों ने कहा, “पागल जरूरत क्या है? हम ईंट के आड़ में आराम से जीते हैं, ना धूप हमें सताती है, ना बारिश हमें सताती है, ना तूफान हमें छू सकता है।

लेकिन वह नहीं माना और परमात्मा ने उसे वरदान दिया और सुबह वह गुलाब का फूल हो गया और सुबह से ही मुश्किलें शुरू हो गयी, जोर की आँधियाँ चली प्राण का रोंआँ रोंआँ काँप गया जड़े उखड़ ने लगी नीचे दबे हुए उसके जाति के फूल कहने लगे, “ देखा पागल को, अब मुसीबत में पड़ा है, दोपहर होते होते सूरज तेज हुआ फूल तो खिले थे लेकिन कुम्हलाने लगे, तूफान आया पंखुडियाँ नीचे गिरने लगी।

 सांझ होते होते इतने जोर की बारिश आयी जड़े उखड़ गई और वह गुलाब के फूल का पौधा जमीन पर गिर पड़ा। जब वह जमीन पर गिरा तब वह अपने फूलों के करीब आ गया। उन फूलों उन फूलों ने उससे कहा

पागल हमने पहले ही कहा था, व्यर्थ ही अपनी जिंदगी गवायी। मुश्किलें ले ली नयी अपने हाथ से।

हमारी पुरानी सुविधा थी, माना की पुरानी मुश्किल थी, लेकिन सब परिचित था, साथ साथ जीते थे, सब ठीक थे।

उस मरते हुए गुलाब के फूल ने कहा,

“ना समझो मैं तुमसे भी यही कहूंगा कि जिंदगी भर ईंट की आड़ में छिपे हुए घास के फूल होने से चौबीस घंटे के लिए फूल हो जाना बहुत आनंदपूर्ण है।

मैंने अपनी आत्मा पा लिया, मैं तूफानों से लड़ लिया ,मैंने सूरज से मुलाकात कि मैं हवाओं से जूझ लिया मैं ऐसी ही नहीं मर रहा हूँ, मैं अपनी जिंदगी को जी कर मर रहा हूँ, और तुम मरे मरे से जी रहे हो। “

निश्चित ही अगर जिंदगी को जिंदा बनाना है तो जिंदा मुसीबतें खड़ी हो जायेगी। इसलिए मुश्किलें आये तो घबराना मत समझ जाना की तुमने जिंदगी जीनी शुरू कर दी है और तुम जिंदगी को जी कर मरोगे।

उस वर्षा से कोई लाभ नहीं जो फ़सल जलने के बाद हो। उस पश्चात से कोई फायदा नहीं जो अवसर चूक जाने के कारण हो।

  स्वामी रामतीर्थ ने कहा है..... इस जीवन को खोए हुए अवसरों की कहानी मत बनने दो। जहाँ अवसर दिखे तुरंत छलांग लगाओ. पीछे मुड़ कर मत देखो। अज्ञात...