गुरुवार, 8 अप्रैल 2021

जिंदगी मे बड़ी शिद्दत से निभाओ किरदार अपना की पर्दा गिरने के बाद भी तालियाँ बजती रहें। #zindagi#motivation#anishamotivation

 जिद जीत की हो तो घाव मायने नही रखते.....

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ये कहानी है 1938 की। कैरोली नाम के एक आदमी की। हंगेरियन आर्मी मैन था और वो उस कंट्री का सबसे उम्दा पिस्तल शूटर था, जितने भी नेशनल चैंपियनशिप हुई थी उसको वो जीत चुका था और सबको मालूम था की 1940 में जो ऑलंपिक होने वाले हैं उसमें गोल्ड मेडल कैरोली को ही मिलेगा।
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और उसने सालों से ट्रेनिंग की थी। उसका एक ही सपना था की उसको अपने आप को बेस्ट शूटर बनाना है। सिर्फ दो साल का फर्क था ओलंपिक के लिए। जब वो आर्मी मे था उसी दौरान 1938 मे एक ट्रेनिंग कैंप चल रहा था। अचानक एक एक्सीडेंट हो गया और उसी दाहिने हाथ में चोट लग गयी और हाथ गवाना पड़ा। उसका सपना उसका फोकस सब चला गया। उसके पास दो ही रास्ते थे या फिर जिंदगी भर रोता रहे या तो अपने गोल पर फोकस करे और उसको पकड़ कर रखे। तो उसने फोकस किया उसपर नही जो चला गया था, उसपर जो उसके पास था और वो था उसका बाँया हाथ। 
एक महीने तक उसके दाहिने हाथ का इलाज चला और एक महीने बाद कैरोली ले अपने बाएँ हाथ से प्रक्टिस करना शुरू कर दिया। ट्रेनिंग के एक साल बाद कैरोली 1939 मे वापस आया, नेशनल चैंपियन्शिप हो रही थी, वहाँ पर बाकी पिस्टल शूटर भी आये थे। उन्होंने कैरोली को शुभकामनाये दी और कहा ये होते हैं एक अच्छे खिलाडी के निशान, इतना सब होने के बाद भी ये हमारा हौसला बढाने आये हैं। किसी को इस बात की खबर तक नही थी की कैरोली ट्रेनिंग ले रहा है।
कैरोली हँसा और उसने कहा तुमहारा हौसला बढ़ाने नही आया हूँ, तुमसे प्रतिस्पर्धा करने आया हूँ, तुमसेे लड़ने आया हूँ।
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और बाकी सब जितने भी लोग थे सब अपने बेस्ट हैंड से कंपीट कर रहे थे और कैरोली अपने बाएँ हैंड से कंपीट कर रहा था और कौन जीता ???? (द मैन विथ ओनली हैंड ) कैरोली।
लेकिन वो यहाँ नही रुका उसका गोल क्लीयर था, वह अपने हाथ सिर्फ अपने कंट्री का नही पूरी दुनिया का बेस्ट हैंड शूटर बनना चाहता था और उसने सारा फोकस डाला 1940 के ओलंपिक पर लेकिन 1940 में जो ओलंपिक होने वाले थे वो कैंसल हो गये।
वर्ल्ड वार की वजह से उसने अपना सारा फोकस डाल दिया 1944 के ओलंपिक पर, लेकिन ये भी ओलंपिक कैंसल हो गया। 
अब उसने सारा फोकस डाला 1948 के ओलंपिक पर । 1938 में उसकी उम्र थी 28 और 1948 में उसकी उम्र होगई 38 और बहुत मुश्किल होता है नये प्लेयर के साथ कंपीट करना लेकिन मुश्किल नाम का कोई शब्द नही था कैरोली के डिक्शनरी में । वो गया 1948 के ओलंपिक में और दुनिया के बेस्ट शूटर्स आये हुए थे और वो अपने बेस्ट हैंड से कंपीट कर रहे थे। कैरोली अपने ओनली हैंड से कंपीट कर रहा था और कौन जीता??? (द मैन विथ ओनली हैंड) कैरोली।
लेकिन वो तब भी नही रुका और 1952 में होने वाले ओलंपिक को दोबारा कंपीट किया और गोल्ड मेडल कौन जीता । कैरोली । चार साल बाद दुबारा से और पूरा इतिहास बदल कर रख दिया । ओलंपिक की इस स्पर्धा में इससे पहले किसी भी खिलाडी ने लगातार गोल्ड मेडल नही जीते थे। 
आप किसी भी लूज़र के पास चले जाओे उसके पास लिस्ट होगी बहानों की। मैं मजबूर हूँ मैं नहीं कर पाऊंगा मेरी परिस्तिथि खराब है और इस वजह से फेल हुआ मैं अपनी लाइफ में । एक लंबी लिस्ट है उनके पास बहानों की और फिर आप किसी विनर के पास चले जाओ उसके पास हजार वजह होगी करने की जो वो करना चाहता है। एक वजह होगी वो करना चाहता है और वो कर जाता है और जीत जाता है। अपनी हर मुश्किलों से ।


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उस वर्षा से कोई लाभ नहीं जो फ़सल जलने के बाद हो। उस पश्चात से कोई फायदा नहीं जो अवसर चूक जाने के कारण हो।

  स्वामी रामतीर्थ ने कहा है..... इस जीवन को खोए हुए अवसरों की कहानी मत बनने दो। जहाँ अवसर दिखे तुरंत छलांग लगाओ. पीछे मुड़ कर मत देखो। अज्ञात...