रविवार, 16 मई 2021

जब हौसला बना लिया ऊँची उड़ान का, फिर देखना फ़िज़ूल है कद आसमान का।।

 हमारे  जिंदगी में कई ऐसे पल आते है जब हमें परेशानियों  का सामना  करना पड़ता है। कई लोग मुश्किलों का सामना करके आगे बढ़ जाते है। तो कोई हार मान कर खुद को ज़िन्दगी के हवाले कर देते है। ऐसे में हमारा और ज़िन्दगी का कोई वजूद नही रहता। दुनिया उसी को सलाम करती है जो अपने कलाम खुद लिखते है।। याद रखना प्रकृती देने से पहले आजमाती है।

 आईये जानते है, एक कहानी से:-

बाज एक ऐसा पक्षी है जिसकी उम्र लगभग 70 वर्ष होती है। परन्तु अपने जीवन के 40वें वर्ष में आते-आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है। उस अवस्था में उसके शरीर के 3 प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं:- पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है, तथा शिकार पर पकड़ बनाने में अक्षम होने लगते हैं। चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है, और भोजन में व्यवधान उत्पन्न करने लगती है। पंख भारी हो जाते हैं, और सीने से चिपकने के कारण पूर्णरूप से खुल नहीं पाते हैं, उड़ान को सीमित कर देते है।

 बदलाओ के प्रतिक्रिया के अन्तर्गत बाज चट्टान में अपनी चोंच मार मार कर दर्द की परवाह न करते हुए तोड़ देता है। अंत में अपने भारी हुए पँखो को भी नोच कर फेंक देता है।

अब इस दर्द भरी विधि को पूरा करने के पश्चयात बाज को पुरानी अवस्था में आने के लिए 5 महिने का इंतेज़ार करना पड़ता है ।इसके बाद बाज का नया जन्म होता  है। जिसके बाद वह एक बार फिर से शिकार कर सकता है,उड़ सकता है , मनचाहा आनंद ले सकता है। आगे की 30 साल की ज़िन्दगी जीने के लिए बाज को इतने मुश्किल हालातों को और कष्टों को सहते हुए गुजरना पड़ता है।


 क्या चोंच को चट्टानों पर मारते हुए दर्द न होता होगा ?? क्या जब बाज अपने पँखो को नोच कर निकलता होगा तो क्या वह  लहूलुहान नहीं होते होंगे ??
 लेकिन बाज अपने हर मुश्किलो का सामना डट कर करता है। और अपनी ज़िन्दगी के 30 साल को बढ़ा कर,अपने जूनून और आत्मविश्वास से जीता है। 

शायद इसलिए  यह हिंदी कहावत कही गई-: 

बाज के बच्चे मुंडेरे पर नहीं नाचते।।


150 दिन न सही, 60 दिन ही बिताया जाये स्वयं को पुनर्स्थापित करने में! जो शरीर और मन से चिपका हुआ है, उसे तोड़ने और नोंचने में पीड़ा तो होगी ही। मगर सफ़लता भी अकाश को छूती नज़र आयेगी। 
इस बार उड़ाने और ऊँची होंगी, अनुभवी होंगी, अनन्तगामी होंगी।हर दिन कुछ चिंतन किया जाये और आप ही वो व्यक्ती है जो खुद को दूसरों से बेहतर जानते है।

please like share comment and follow............thank you




5 टिप्‍पणियां:

Ankita ने कहा…

The struggle you're in today is developing the strength you need for tomorrow. You always come up with great blog stories.....

प्रेमा ने कहा…

बहुत सुन्दर

Mandavi ने कहा…

Nice one

Unknown ने कहा…

👌👌awesome

Shivshankar Tiwari ने कहा…

Bahot khoob

उस वर्षा से कोई लाभ नहीं जो फ़सल जलने के बाद हो। उस पश्चात से कोई फायदा नहीं जो अवसर चूक जाने के कारण हो।

  स्वामी रामतीर्थ ने कहा है..... इस जीवन को खोए हुए अवसरों की कहानी मत बनने दो। जहाँ अवसर दिखे तुरंत छलांग लगाओ. पीछे मुड़ कर मत देखो। अज्ञात...