नेगेटिव बातें आप को अंदर ही अंदर बर्बाद कर देती हैं और आपको अपने सपनो से दूर ले जाती है। अगर अंधो की दुनिया में पहुँच जाना तो अपनी आँख की घोषणा मत करना। वो तुम्हारी आँखे निकाल लेंगे, वो बरदाश्त ना कर सकेंगे की तुम आँख वाले हो। इसलिए कभी नेगेटिव लोगों की संगत मे मत पड़ना।
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एक गांव में एक बुढीया रहती थी, गांव छोटा था
सीधे साधे लोग थे वहाँ के, बुढ़िया चालाक थी धनवान थी। वो लोगों की जमीन पर
ब्याज मे लोगों को पैसे देती थी। उस बुढ़िया का एक नौकर था, वो इस बुढ़िया
के लोगो के प्रति ऐसे बर्ताव से बहुत दुःखी हो जाता, कभी कभी तो उसके मन
मे आता की कोई इस बुढ़िया का गला क्यूँ नही दबा देता, कोई इसे मार क्यूँ
नही डालता। फिर वह सोचता की जाने दो मुझे इससे क्या? कौनसा इस बुढ़िया ने
मेरे साथ ऐसा किया है। फिर कई वर्ष बीत गए ऐसा ही चलता रहा लोग बुढ़िया के
पैसे चुका नही पाते बुढ़िया जमीन हड़प लेती। लोगो को आधे आधे दाम भी ना
मिलते उनकी जमीन के।
हर बार उस नौकर
के मन मे ये बात और घर करती गयी की इस बुढ़िया को कोई मार क्यूँ नही डालता
इसका कोई गला क्यू नही दबा देता। जबकि नौकर से इसका कुछ लेना देना ना था।
उसके साथ तो बुढ़िया ने कुछ किया भी ना था। पर जो बीज उसने अपने मन मे बोया
उस बुढ़िया के हत्या के प्रति वो पेड़ बनने लगा। उस नौकर को इस बात की
खबर नही की वो अपने आप से क्या बोल रहा हमेशा।
एक
दिन नौकर को भी पैसों की जरूरत पड़ी और मजबूरी के चलते उसे भी बुढ़िया से
मदत मांगनी पड़ी। हालांकि ये पहली बार था की बुढ़िया से उसने मदत मांगी थी।
हमेशा की तरह वो जमीन के कागज ले आया और जैसे ही बुढ़िया अपने तिजोरी के
पास गयी ना जाने क्या उसके मन मे आया और पीछे से आकर उसने बुढ़िया का गला
दबा दिया। बुढ़िया तड़पती रही पर इसके अवचेतन मन मे ना जाने क्या हुआ इसने
बुढ़िया का गला दबाये रखा जब तक की वो मर नही गयी।
जैसे
ही बुढ़िया मरी इसे जैसे किसी ने झकझोर दिया हो हाथ छूट गए, हाथ पैर ठंडे
पड़ गए। उसकी समझ मे नही आया की क्या हो गया। ये मुझसे किसी की हत्या हो
गयी, ये कैसे हो गया। पर जो बीज घृणा का अपने मन मे वो पाल रहा था आज वो
पेड़ बन गया था, अब उसका पछतावा किसी काम का ना था। उस घृणा के एक छोटे से
बीज ने इसे हत्यारा बना दिया।
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दोस्तो हम भी ना जाने कितनी बातो का ऐसा ही
बीज अपने मे डाल देते है जिन बातो का हमसे लेना देना भी नही उसके प्रति भी
हम अपने आप को ऐसे ही घृणा से नेगेटिविटी से भर लेते हैं।
याद रहे दोस्तो एक सिर्फ एक बीज नेगेटिविटी का हमे वो बना देता है जो हम हैं ही नही।
जिन
बातों का हमसे कोई लेना देना नही, फिर यही नकारात्मकता का छोटा सा बीज
वृक्ष का अवतार लेकर बड़ा हो जाता है और हमे ही कही ना कहीं बर्बाद कर देता
है।
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10 टिप्पणियां:
Amazing.
आपने बड़े हृदयस्पर्शी एवं मार्मिक तरीके से वास्तविकता का वर्णन किया है। मैं पंकज त्रिपाठी आआपसे सहमत हूँ।
Wow anisha keep it up
Amazing story
Bahut hi achi story hai. Mujhe bahut motivation mila apke story se
Excellent motivational
story.
बहुत सुन्दर
Wonderful content ; dealing with the practical content.
Great
पानी को बर्फ में,
बदलने में वक्त लगता है !!
ढले हुए सूरज को,
निकलने में वक्त लगता है !!
थोड़ा धीरज रख,
थोड़ा और जोर लगाता रह !!
किस्मत के जंग लगे दरवाजे को,
खुलने में वक्त लगता है !!
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