हमारे दिमाग में लगभग एक दिन में 60 हज़ार विचार आते है और दुर्भाग्य से पंचानबे प्रतिशत विचार वही होते है जो पिछले दिन आये थे। एक दिन में एक औसत इंसान के पास कितने विचार आते है ????? 60 हजार, ये सइंस कह रही है।
और दुर्भाग्य देखो जो 60 हज़ार आते है उनमें से 95% विचार वो आते है जो कल वाले थे। और अब ये दुर्भाग्य वाली खबर किनके लिए है???जिनके कल के विचार इतने नकारत्मक थे, जो कल नकारात्मक विचार से और अपने द्वारा लिए गए गलत फैसलों पर रो रहे थे,जो कल बर्बादी की सोचते थे, तो आज वाले में टोटल विचारो में से पंचानबे प्रतिशत कौन से आएंगे??? बर्बादी के, वही रोना, कुछ लोगो का दूसरों से कहना मैं तो थक गया हूं ज़िन्दगी से, मुझे कुछ नहीं मिला। उनकी सुबह रोते हुए शुरू होती है। और ऐसे लोगो का दिन भी उनके विचारों की तरह होता है , एकदम रोता हुआ।
अगर आप ड्रीम ड्रिवेन पर्सन है, खुद को अपने सपनों के लिए झोक रहे है , और अपने सपनों को लेकर सकारात्मक है, अच्छा सोचते है, तो कल के आने वाले साठ हजार विचार में से 95% विचार सकारात्मकता के होंगे।
इसलिए ये खबर आपके लिए अच्छी तब होगी जब आप आज पॉजिटिव रहोगे और कल के आने वाले 60 हजार विचार के 95% विचार आपके पॉजिटिव होंगे।
आईये एक छोटी सी कहानी से देखते है कि कैसे एक छोटा सा विचार हमारे जीवन को बदल सकता है।
एक पुरानी कहानी है एक गाँव में एक कुम्हार रहता था। वह बहुत अच्छा मिट्टी के बर्तन बनाया करता था। एक दिन कुम्हार के हाथ मिट्टी में गुंथे हुए थे। इतने में कुम्हार की पत्नी आकर पूछती है ये क्या बना रहे है , कुम्हार उत्तर देते हुए कहता है कि चिलम बना रहा हूं।
आजकल चिलम की बिक्री बाजार में बहुत ज्यादा है ।
कुछ देर बाद पत्नी ने कहा , गर्मी भी तो आ रही है, आप सुराही क्यों नहीं बनाते लोगो को ठंडे पानी की जरुरत होगी तो लोग सुराही में पानी रखेंगे और इस तरह से सुराही भी खूब बिकेगी।
कुम्हार ने कहा बात तो सही है उसने मिट्टि को छोड़ दिया और दोबारा नयी मिट्टी को गूँथना शुरू किया।
और जब कुम्हार ने मिट्टी को सुराही का रूप देना शुरू किया, तो कहते है मिट्टी से आवाज़ आयी। बड़ी नम्रता के साथ मिट्टी ने कुम्हार से पुछा; ये क्या कर रहे हो??? पहले तो कुछ और रूप दे रहे थे अब कुछ और रूप दे रहे हो।
कुम्हार का जवाब था -- कुम्हार ने कहा मेरा विचार बदल गया।
मिट्टी का जवाब था -- मिट्टी ने कहा तुम्हारा विचार बदला मेरी तो ज़िन्दगी बदल गई।
कुम्हार मिट्टी की तरफ आश्चर्य से देखता रहा और उसने दोबारा मिट्टी से सवाल किया कैसे तुम्हारी ज़िन्दगी बदल गई?
मिट्टी ने उत्तर देते हुए कहा - चिलम बनती तो मुझमें आग भरी जाती, खुद भी जलती दुनिया को भी जलाती, लेकिन अब सुराही बनी हूँ तो मुझमें जल भरा जायेगा अब खुद भी शीतल रहूंगी और दुनिया को भी शीतल रखूँगी।
यदि जीवन में हम सभी सही फैसला लें तो हम स्वयं भी खुश रहेंगे, एवं दूसरों को भी खुशियाँ दे सकेंगे।
” आपका एक विचार आपकी और दूसरों की ज़िन्दगी बदल सकता है , इसलिए जब भी सोचे, कोई भी विचार आये उसे सकारात्मकता की दृष्टि से देखे।
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5 टिप्पणियां:
Wonderful
Very nice story👌👌
बहुत ही अच्छा लिखा है। इसे जारी रखो 👍🏻
Indeed 😊
Impressive motivation
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