रविवार, 4 जुलाई 2021

"सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग"।

 




आप चाहे जो कर लो, लोग आलोचना करना बंद नहीं करेंगे। लेकिन हमें जिंदगी में आगे बढ़ना है, ऊंचे मुकाम हासिल करना है। तो हमें लोगों के बहकावे में नहीं आना है, क्योंकि जितने मुंह है उतनी ही बाते होती है। इसलिए हमें अपने सपनों को पूरा करने के लिए जी जान से जुट जाना है। लोग क्या कहेंगे इसके बारे में मत सोचिये अगर आप समाज के कारण अपने जिंदगी के फैसले लेते है तो याद रखिए जब इन्ही फैसलों के कारण आप दुखी होते है रोते है तब ये समाज आपके अंशु पोछने नहीं आयेगा। क्योंकि अस्सी प्रतिशत लोंगों को कोई दिक्कत नहीं है कि आपको तकलीफ है। और बीस प्रतिसत लोग खुश है कि आपको तकलीफ है। याद रखिए  दोस्त जो भी कुछ करना पड़े आपको अपने सपनो को पूरा करने के लिए और ज़िन्दगी में खुश रहने के लिए आप करिये ये मत सोचिये की लोग क्या कहेंगे, क्योंकि लोग तब भी कहेंगे जब आप कुछ नहीं करेंगे। "कुछ तो लोग कहेंगे लोगो का काम है कहना"। मन हमारा है तो मनोबल भी हमारा होना चाहिए।

आईये एक कहानी से शुरू करते है.....

एक बार की बात है। एक बाप बेटा घोड़े की सहायता से कही जा रहे थे। बाप ने बेटे को घोड़े पर बैठा रखा था और खुद पैदल चल रहा था।
यह देखकर लोगों ने कहा, “कैसा बेटा है! जो अपने बाप को पैदल चला रहा है और खुद घोड़े पर बैठा है।”
लोगों की यह बात सुनकर बेटा नीचे उतर गया और अपने पिता को घोड़े पर बिठा दिया और आगे की राह पर चल पड़े।






कुछ ही दूर चलने पर वापस लोगों ने उन्हें देखा तो बोले, “कैसा बाप है जो अपने बेटे को पैदल चलवा रहा है और खुद घोड़े पर बैठा है।”

यह बात सुनकर पिता भी घोड़े से उतर गया और दोनों बाप बेटे पैदल चलने लग गए।
कुछ दूर चलने पर फिर लोग मिले तो बोले, “कैसे मूर्ख लोग हैं, जो साथ में घोड़ा होते हुए भी पैदल चल रहे हैं।”

यह बात सुनकर बाप बेटे का दिमाग खराब हो गया। अब दोनों घोड़े के ऊपर बैठ गए। और वहां से आगे की ओर निकल गए।


लेकिन कुछ ही दूरी पर कुछ लोग मिले जो कहने लगे, “कैसे निर्दयी इंसान हैं। दोनों घोड़े पर बैठे हुए हैं और कमजोर घोड़े की जान निकाल रहे हैं। इनके पास कुछ भी दया नाम की चीज नहीं है।”



अब पिता को एक बात समझ में आ गई कि लोगों की बातो के चक्कर में रहे तो हम अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाएंगे।

जिंदगी की सबसे बड़ी विडंवना यह है कि हम कोई काम शुरू करने से पहले ही इस असमंजस या दुविधा में पड़ जाते हैं कि हमारे काम की दशा, दिशा, मार्ग, सफलता या असफलता पर लोगों की प्रतिक्रिया क्या होगी। ऐसे में तयशुदा लक्ष्य व उसकी प्राप्ति के मार्ग से भटक जाना हमारी नियति बन जाती है। ईश्वर ने आपको एक पूरी स्वतंत्र इकाई के रूप में धरती पर भेजा है – सम्पूर्ण कौशल, व्यक्तित्त्व , शरीर व बुद्धि के साथ। इसलिए आपको अपने लक्ष्य व मार्ग दोनों स्वयं ही तय करने हैं। लोग क्या कहेंगे ये हमारी आत्मा बन गई है।और मजे की बात है, आप जिनसे डरते है कि लोग क्या कहेंगे,वह आप से डरते है कि यह लोग क्या कहेंगे। सभी एक दूसरे से डर रहे है और जीवन गवा रहे है।

कोई टिप्पणी नहीं:

उस वर्षा से कोई लाभ नहीं जो फ़सल जलने के बाद हो। उस पश्चात से कोई फायदा नहीं जो अवसर चूक जाने के कारण हो।

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