रविवार, 15 अगस्त 2021

अपनी तुलना किसी से मत करिए, क्योंकि हर फल का स्वाद अलग -अलग होता है।

तुम अपने को रत्ती भर काम मत आँकना। ईश्वर ने तुम्हे अनूठा बनाया है। 

हजारों,लाखों, और करोड़ों अरबों के बीच तुम अद्वितीय हो। 

अपनी तुलना करके आप ईश्वर पर संदेह करते है। याद रखना कार्बन कापियाँ सदा कुरुपित होती है। इसलिए किसी के जैसा बनने का प्रयास मत करना। 

किसी से किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता नहीं है। 

आप स्वयं में जैसे है एकदम सही है। खुद को स्वीकार कीजिये।


एक कहानी से समझते है....

एक आदमी निरंतर रोता। उसे परमात्मा से बड़ी शिकायते थी।

 वो कहता है, प्रभू मुझे इतना दुखी क्यों बनाया??? मैंने आपका क्या बिगाड़ा है???

 ये अन्याय हो रहा है। मैं सुनता था कि आप बहुत कृपालु है, दयावान है, महाकरुणावा है। 

मगर सब बातें धोखा है। मुझे इतना दुःख क्यों दिया??? सब मजे में है, सब आनंद कर रहे है।

 मैं ही दुःख में सड़ा जा रहा हूँ। मुझे पर भी कृपा करें! 

अगर सुख न दे सके, तो कम से कम इतना तो करो, की किसी और का दुःख मुझे देदें।

 ये मेरा दुःख किसी और को देदें। इतना तो करें!
एक रात उसने सपने में देखा की कोई आवाज़ आकाश से  कह रही है कि

 सब सभी अपना दुःख लेकर गाँव के बरगद  वृक्ष के पास ले कर पहुँच जायें।
वो तो बड़ी जल्दी तैयार होगया। 

उसने जल्दी से अपना दुःख बांधा पोटली उठाई भागा वृक्ष की तरफ। 







खुद भी भागा। उसने देखा,,बड़ा हैरान हुआ पुरे गाँव के लोग अपनी अपनी पोटलियाँ लिए जा रहे है।
वह तो सोचता था जिनके जीवन में कोई दुख नही है.....

राजा भी भागा जा रहा है, वजीर भी भागे जा रहे है, नेता भी भागे जा रहे है।

 उसने देखा की सब अपने गट्ठर लिए,भागे जा रहे है।सबके गट्ठर है






और एक बात और हैरानी की मालूम हुई...किसी के पास छोटी मोटी पोटली नही। 

क्योंकि वह सोचने लगा की किससे बदलना है। अगर बदलने का मौका आजाये। 

मगर सब बड़ी बड़ी पोटलिया लिए हुए है। ये पोटलियाँ तो कभी दिखाई भी नही पड़ी थी उसको। 

अब सब वृक्ष के पास पहुँच गए। सारे लोग खुश है, की आज दुःख से छुटकारा मिल जायेगा। 

सब सोच रहे है कि क्या होने वाला है।
फिर एक आवाज़ हुई की सब अपनी अपनी पोटलियाँ वृक्ष के नीचे रख दें। 

सभी ने जल्दी से पोटलियाँ रख दीं।क्योंकि सब को आने दुःख से छुटकारा पाना चाहते थे। 

अब फिर से एक आवाज़ हुई की जिसको जिसकी पोटली चाहिए चुन लें, बदल लें

और वो आदमी भागा और सारे लोग भागे। मगर चकित होने की बात तो ये थी की, 

उस आदमी ने भाग कर फिर से अपनी पोटली उठा ली,की कोई दूसरा न उठा ले

और यही हालात सबकी थी। सबने अपनी अपनी पोटलियाँ उठाई।








वो बड़ा हैरान हुआ, लेकिन अब बात उसके ख्याल में आगई की उसने अपनी पोटली क्यों उठाई ??? सोचा की अपने दुःख काम से कम परिचित तो है। 

दूसरे का बड़ा पोटला है, पता नहीं इसके भीतर क्या हो अपने दुःख कम से कम जाने माने तो है। 

उनके साथ जीते तो रहे है ज़िन्दगी भर। धीरे धीरे अभ्यस्त भी होगये है और अब धीरे धीरे उतना उनसे  दुःख भी नहीं होता।

कांटा गाड़ता ही रहा हो, गाड़ता ही रहा हो तो धीरे धीरे चमड़ी भी मजबूत हो जाती है।

 सरदर्द ज़िन्दगी भर होता ही रहा हो तो आदमी भूल ही जाता है....

सरदर्द और सर में फर्क ही नहीं रह जाता। एक अभ्यास हो जाता है।
और तब उसे समझ आया की सबने अपनी पोटलियाँ क्यों उठा ली

और सब बड़े खुश है कि अपनी पोटली वापस मिल गई।
और सब अपने घर की तरफ भागे जा रहे है।
सुबह जब उसकी नींद खुली तब उसे सच्चाई समझ में आई... ऐसा ही है। 

यहाँ सब दुखी है। यहाँ सब परेशान है। जिसकी मर्ज़ी खुश रहे। 

जिसकी मर्ज़ी दूसरों से अपनी तुलना करके दुखी रहे।

अपने जीवन की दूसरों से तुलना न करे। आपको इस बात का बिलकुल भी भेद नहीं है, 

कि उनकी जीवन यात्रा किस प्रकार की रही है। 

हमें हमेशा लगता है कि दूसरों को हमसे ज्यादा अच्छा जीवन मिला है।

जब की वास्तविकता यह  होती है की सब लोगों की अपनी अलग परेशानी और अलग उपलब्धि होती है। तो पते की बात यह है कि जो हमें  भगवान ने दिया, वह हमारे लिए उपयुक्त है। 

हमें तुलना करने से बचना चाहिए। तथा अपने कर्म और परिश्रम से 

पने जीवन में इच्छित लक्ष्य की प्राप्ति करनी चाहिए।

1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

Bahut khoob 👏👏👏👏

उस वर्षा से कोई लाभ नहीं जो फ़सल जलने के बाद हो। उस पश्चात से कोई फायदा नहीं जो अवसर चूक जाने के कारण हो।

  स्वामी रामतीर्थ ने कहा है..... इस जीवन को खोए हुए अवसरों की कहानी मत बनने दो। जहाँ अवसर दिखे तुरंत छलांग लगाओ. पीछे मुड़ कर मत देखो। अज्ञात...